गाडी बुला रही है …

बचपन से ही मुझे रेलगाडी के प्रति एक ज़बर्दस्त आकर्षण भी है और वो मेरी भावनाओं के साथ भी जुडी है. अपनी नौकरी के कारण मुझे भारत में कई जगह घूमने का मौका मिला और मैंने रेल से कई भार यात्रा की है और आगे भी करता रहूँगा.
हिंदी सिनेमा में रेलगाड़ी पर हमेशा कई दृश्य फिल्माए गए है. कई बार नायक और नायिका रेल गाडी पर गाना गाते हुए, तो कई बार मिलने बिछड़े के दृश्य, तो कई बार फिल्म के किरदार रेल कि यात्रा करते हुए, या अपना घर-बार छोड़ कर जाते हुए दिखाए गए हैं.
मैं ऐसी फिल्मों कि सूची बनाना चाहता हूँ, और उन फिल्मों में रेलगाड़ी का कैसे उपयोग किया गया यह भी साथ में जोड़ना चाहता हूँ. इसमें समय लगेगा और आप के सुझाव भी चाहिए होंगे.
मेरी सबसे गुज़ारिश है कि आप अगर यह लेख पढ़ लेतें हैं तो इस पर अपनी कमेन्ट में ज़रूर ऐसी फिल्म का नाम भी लिखें, या आपने जिस फिल्म में ऐसे दृश्यों को पसंद किया हो उस फिल्म का नाम या गाना जो भी हों उसे ज़रूर लिखें.
आज के लिए मैं मेरे सबसे पसंदीदा रेल गीत के कुछ अंश यहाँ पुनःपेश करता हूँ जो सन १९७४ में बनी फिल्म ‘दोस्त’ का गीत है. इसे आनंद बक्षी ने लिखा है और सुरों में ढाला है लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने …
गाडी बुला रही है
सीटी बजा रही है
चलना ही ज़िन्दगी है
चलती ही जा रही है

देखो वो रेल
बच्चों का खेल
सीखो सबक जवानों
सर पे है बोझ
सीने में आग
लब पे धुँआ है जानों
फिर भी ये जा रही है
नगमें सुना रही है
गाडी बुला रही है
सीटी बजा रही है …

(इस पूरे गीत का आनंद आप इस कड़ी पर जाकर ले सकतें हैं )