‘आशीर्वाद’

माँ
आँचल तेरा है समुन्दर से गहरा
किनारे की अहमियत ही कहाँ थी
तू जो है साथ मेरे माँ
मुझे बेगानों की ज़रुरत ही कहाँ थी

पापा
सपनों कि कमी न होने दी आपने
ख्वाहिशें हमारी की पूरी
खुदके सपनों से पहले देखि हमारी ख़ुशी
पापा आपके बिना ये सपनों की दुनिया है अधूरी

गुरु
खुद पे यकीन करना सिखाया
उम्मीदों कि राह पे चलना सिखाया
सही और गलत में फर्क समझा के
गुरुजी अनजाने में आपने
हमें जीना सिखाया

माँ कि अहमियत जानी हर गुज़रते पल के साथ
पापा कि अहमियत जानी हर पुरे होते ख्वाब के साथ
गुरु कि अहमियत जानी जब हर नया मकाम हासिल हुआ
आप तीनों का आशीर्वाद सदा रहे हम पे
यही है हमारी दिल से दुआ …

(19.02.17, written for College day 2017)

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष – कहाँ पे जाये कचरा … !!

(आज विश्व पर्यावरण दिवस के साथ साथ हम इस ब्लॉग की सातवीं सालगिरह भी मना रहे है.
इस अवसर पर इस ब्लॉग के संस्थापक सदस्य मेरे मित्र श्री. आशीष तिलक तथा श्री. भरत भाई भट्ट को, और आप सभी पाठकों, मित्रों को ढेरों शुभकामनाएं )

हम लोग कितना कचरा निर्माण कर रहे है, इसका अंदाजा भी शायद हम नहीं लगा सकते. लेकिन एक सफाई वाले कि नज़र से देखे और सोचे, तब पता चले कि यह विषय कितना गंभीर है.
मैं इस सम्बन्ध में ‘सांख्यिकी’ या ‘आंकड़ों’ के पचड़े में नह पड़ना चाहता. क्यों कि मैं जानता हूँ कि वास्तविकता कहीं ज्यादा भयंकर है और आंकड़े इस समस्या के समाधान का, या इसमें दिन –ब-दिन जरुरी सुधार का पैमाना नहीं बन सकते और न ही बन पाएंगे.
हजारों लाखों टन कचरा हर रोज हमारे आस-पास परिसर में लाकर ढेर कर दिया जाता है. इस कचरे का फिर क्या होता है? ये कूड़े का ढेर आखिर किस सागर में समाता है ? क्या अलग अलग तरह का कचरा छंटनी किया जाता है? क्या पुनः चक्रित होने वाली चीजों को पुनः प्रयोग करने के लिए प्रकिया में लिया गया है? क्या हर चीज़ को उसकी विशिष्टता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है/ किया गया है?

क्या प्रदुषण न फैले इसका ध्यान रखा गया है? और सबसे बड़ी बात कही कोई अवशेष बाकि तो नहीं रह गए है. क्या हर वस्तू का उसकी विशिष्टता के आधार पर उचित निरूपण किया गया. जो खतरनाक और घातक रसायन या अपव्यय है उनके निबटारे में क्या जरुरी सावधानी बरती गयी है.

जिंदगी कि भाग दौड़ इतनी तेज हो गयी है कि किसी के पास यह सब सोचने और उस पर मंथन करने का समय ही नहीं मिल पा रहा है.
परिणाम है प्रदुषण – महा भयंकर प्रदुषण, प्रकृति के ऋतू चक्र में बदलाव , वातावरण में परिवर्तन. शायद इसीलिए अब बारिश में वैसी बारिश नहीं होती जैसे हमारे बचपन के दिनों में होती थी. अब तो कभी आधे किलोमीटर परिक्षेत्र में बरसात होती है तो थोडा आगे जाते ही आपको एकदम सुखा भी मिलता है. अब घनघोर वर्षा तो होती है लेकिन लगातार नहीं होती , कई दिनों तक तो होती ही नहीं.
और बीते हुए कुछ वर्षों में ‘जलवायु’ में जो बदलाव देखे गए हैं उससे हम सब अछि तरह वाकिफ है ही , जैसे की – इस साल भीषण गर्मी पड़ी, कई शहरों के तापमान में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है, पिछले साल कहीं भीषण सूखा पड़ा, तो कहीं भीषण बाढ़ आयी, और बारिश औसतन कम रही, जब ज़रूरत थी तो बारिश नहीं आयी, और जब आयी तो बर्बादी लेकर. यह सब घटनाएं पर्यावरण में बदलाव के संकेत है, जिससे हमें सबक लेना चाहिए. और प्रकृति के बचाव के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए.
जो स्वच्छता मुहीम २ अक्तूबर से चलायी गयी, उस पर कहाँ और कितना अमल हुआ इसका भी समय समय पर समीक्षा होनी चाहिए. क्योंकि पिछले कुछ दिनों में मुझे कई बार कार्यवश कुछ बड़े-छोटे शहरों कि यात्रा करनी पड़ी और वहाँ ज्यादातर मैंने पाया कि ‘गन्दगी’ का ‘साम्राज्य’ अभी भी जारी है.
दुःख इस बात पर हुआ कि उन् शहरों के जो प्रमुख सरकारी दफ्तर है जो जिला-स्तरीय कार्यालय है उनके पास तक ‘कूड़े-कचरे’ का ढेर पाया गया और प्रतीत होता था कि वहाँ पर कई कई दिनों तक सफाई हुयी ही नहीं है और होती भी नहीं है.
(कुछ दिन पूर्व अहमदाबाद से वड़ोदरा जाते हुए एक्सप्रेस-हाईवे से पहले अहमदाबाद शहर का कूड़े का ढेर देखने को मिला, जिसको शहर से बाहर इक्कठा कर जलाया जाता है, ये ढेर अपने आप में एक बड़े ‘टीले’ में तब्दील हो गया है और दिन ब दिन इसका स्वरुप्प और विकराल होता जा रहा है.)

तो हमारी ‘अनास्था’ का दौर अभी जारी है. हमारी ‘बेरुखी’ अभी ‘खत्म’नहीं हुयी है !!

और जाहिर है कि केवल किसी एक दिन अगर प्रधानमंत्री हाथ में झाड़ू लेकर सफाई करेंगे और सोचेंगे कि सब कुछ सही होने जा रहा है, तो वैसा नहीं होगा. लोगों को स्वयं ये जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी. और तो और जो लोक प्रतिनिधि है उन्हें तो विशेष प्रयास करने होंगे और उन्हें ये करने भी चाहिए क्योंकि राज्य में या जिले में वे एक ऐसी सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे है, जिसने देश में बदलाव लाने कि बात कही थी, जिसने ‘घिसे-पिटे’ तरीकों से लोगों को ‘निजात’ दिलाने का वायदा किया था (चुनाव से पहले). लेकिन लगता है सरकार नयी नयी योजनाएं शुरू कर और उनका ढिंढोरा पीटकर खुद ‘घिस-पीटकर’ वापस ‘सत्ता’ कि ‘हसीन’ दुनिया में खो जाती है …फिर आज एक टीवी चैनल पर साबरमती नदी में कूड़ा-कचरा फेंकते हुए कुछ लोगों को दिखाया गया और उनसे पूछे गए सवालों का जिस ‘बेशर्मी’ से इन लोगों ने जवाब दिया,  उससे जाहिर होता है की अभी भी हमारे देश और देश के संसाधनों के प्रतिप्रति, पर्यावरण की रक्षा के प्रति और यहाँ तक की हमारे बच्चों के भविष्य के प्रति हम कितने उदासीन और संवेदनहिन् बनते जा रहे है … ऐसे में टनों टन इकठ्ठा हो रहे ‘कचरे’ की परवाह कौन करता है …

‘Jan Gan’ ke ‘Man Ki Baat’ – Deeply Disappointed or Hopes Alive?

The NDA government at the Centre has completed a year in office.

During the previous UPA government’s term from 2009 to 2014, in 2009 while assuming the power in its second term after 1999 the earlier Congress government, had promised a lot to achieve in their first ‘100 days’, and which we all know what they achieved, leave alone the first ‘100 days’, but even during the whole term of five years.

So, when the Country went to poll in April-May 2014, the urge for an ‘overall change’ in the public brings in the new BJP government at the Centre.

When BJP come to power a media house conducted a ‘survey’ asking the people their ‘hopes from the Modi government’ (wherein I also get a chance to share my views with them)

It was on 23rd of May, that I contact them and send a mail, wherein I refer them two posts on my blog and I write to them as below;

‘Till I forward my list of hopes one by one, I would like to share these links from ‘Samajshilpi’ blog of poems and articles related to Namo

Bharat Namo Namaah:
Namo Bharat:

And later on, on 26th May I had specifically sent this message then;

‘We hope the new government totally accountable towards the public and will establish law and order in the society. It should establish the ‘rule of the law’, should instill faith in the public, should rebuild INDIA as a ‘living soul’ and would promptly react to the problems of ‘common man’…”

Apart from the above when the agency called to me on 26.05.2014 (I hope I am correct) I told them that what I wish to see after this government’s taking over was an ‘overall change in the attitude’ of the government machinery towards people and this government will ensure to awake the ‘soul of the nation’ taking all into one thread and helping in to build an “atmosphere of peace and harmony” among the people of India.

So, if we have to assess the improvements under the new government at the center, we can do this only by tracking with our hopes and aspirations from the new government or the disappointments from the earlier UPA rule or the reasons for which people vote for ‘change’.
On 28.04.2011 I had written this article ‘Deeply disappointed’ wherein I had mentioned my thoughts about the various issues and the sentiments about the social issues that we ‘the people of India’ are concerned with.
It was the time, when the movement led by Anna Hazare was in full swing and the country embarked upon a new beginning …
I am reproducing the same article below again and wish that the readers share their views and comments about how they view these issues and there dealing with by the new government – the ‘Namo’ government.
While the media took on the ‘Performance’ of the new government within the last one year I think it is better to assess where the ‘common man’ stand today after ‘four years’, and not after ‘one year’, since the ‘issues’ concerning with the general public matters much more, irrespective of who came to power.
And I am sorry to say that, inspite, of the ‘hope’ and the ‘hype’ for development and ‘acche din’, there are still many core issues that this government needs to tackle with..

I hope that the ‘list of disappointments’ given in the below article rightly expresses our ‘Hopes from the Namo Government’ and the ‘grave areas’ where this government still needs to put in ‘serious and sincere efforts’…
अविनाश (Scrapwala) ની રચના April 28, 2011
(‘Deeply disappointed ’…सा)

When our respected Prime Minister expressed his ‘deep disappointment’ over Anna Hazare’s fasting, it left me hurt, and the many disappointments that I feel time to time and in our daily routine which gets backtracked with time, started hammering me.
These are the ‘disappointments’ that I carry and for that matter most of my fellow countrymen also carry, but we do not let our respected PM know (?) all these.
Now, taking this opportunity I would like to let our PM knows how much disappointed we are; I feel disappointed because still after 62 years of independence many of us are still deprived of basic amenities, many do not get food and die of starvation, ‘shelter’ for all is still a ‘dream’, many villages are still without ‘electricity and ‘power-cuts’ & ‘load-shedding’ continue to remind us that ‘development’(?) is still a ‘distant dream’. Even we do not have ‘pucca’ road at many places and wherever they are the condition is not good and the roads are not repaired and maintained properly.
Atrocities on children have increased, children lost are not traced back, Rape and Ransom killings have become a social menace, cricketers are paid more than the jawans who lost their lives while fighting at border and in house with Maoists, naxalites and mafias.
We are absolutely helpless on the increasing Crimes, Rape, Ransom killings, Ragging and to add this the 4th evil R of our society –Reservation issues- which freely allows to loot the national property and all innocent suffers on account of road blockages-train blockages etc and moreover nation looses revenue on account of non-functioning of our day to day businesses.
When so many do not get food for even one time our MPs are served with subsidized food. Billion of rupees are wasted due to non-functioning of the Parliament. I feel very disappointed when maximum farmers commit suicide from the state which the Agriculture Minister belongs to.
Serious issues are easily politicized to reduce their gravity and public attention is diverted by creating fraction among society and their various groups.
I feel agonized when I cannot call back the non-performing and corrupt MPs and replace them with a new one.
When traffic restrictions during Ministers and Prime Minister’s visit left someone die because of not getting medical treatment or reach hospital within time, what should we feel like?
Our jawans are lost to frequently fighting infiltration in Kashmir whereas the likes of Afzal Guru and Kasab enjoy our hospitality in jails. Attack on parliament left many jawans killed and similarly we lost officers like Karkare in terrorist’s attacks but the ‘culprits’ and ‘masterminds ‘ are still alive. Martyr’s families are treated badly; even their widows are treated badly and terrorized by antisocial elements.
Where the common man is struggling to make both ends meet together Corrupted politicians and goons are really enjoying the party. Corruption is scaling newer heights and increased to such an extent that honest officers are burnt alive and harassed to the level that they commit suicide.
And to summarize at last- appointment of corrupt CVC, Sex scandals, sex-for-marks scandals, never ending scams, Inflation, price –rise, killing of RTI activists, aborting girl child, honor killings, Jessica –Mattoo murder, Nithari case, Aarushi case, railway accidents-unmanned railway crossings-crimes in trains, the innumerous murders and rapes reported and not reported, the central agencies and human rights cry for the criminals died in en-counter in Gujarat but sleeps when murders, rapes, burnt alive incidents took place in UP. Environmental issues are also politicized and used to discriminate between states. You as a ‘CEO’ of this country have to own this and responsible for all.
And last but not the least my respected Sir, a person like you instead of supporting Hazare’s movement
and welcoming his step was ‘disappointed’… and this is enough to disappoint all of us.
At least the public has not cheated you; they have given you a second term, But for the FOUR days of Anna’s fast we feel cheated by the ruling party and that too a party like ‘congress’ which took four days time to agree to Hazare’s demand.
(I have deliberately delayed the publishing of this post, so that the disappointments are not faded with time. I hope that the list will reduce with time instead of growing further).

Contd …

जन गण मन !!!

आज प्रधानमंत्री ने किसानों से अपने मन कि बात कही. विशेष कर उन्होंने भूमि अधिग्रहण कानून सम्बन्धी कुछ ‘भ्रम’(जो चर्चा में है) दूर करने कि कोशिश कि और किसानों से आग्रह किया कि वे उन पर विश्वास करें और इस कानून का समर्थन करें.
ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री जी ने केवल यही बात की. उन्होंने हाल ही में हुयी बे-मौसमी बारिश और ओला वृष्टि से हुयी फसल कि बर्बादी को लेकर भी चिंता जताई एवं अपने सम्बंधित मंत्रीयों से इस बारे में कही गयी कारवाई का भी हवाला दिया.
लेकिन, कुछ प्रमुख टीवी समाचार चैनलों पर जिस तरह कि चर्चाएं इस ‘मन कि बात’ को लेकर हुयी और उसमे जो किसानों कि प्रतिक्रियाएं आयी, उससे साफ़ हो गया कि इस ‘मन कि बात’ को लेकर लोगों में और विशेष कर किसानों में निराशा का माहौल बना दिया.
या तो प्रधानमंत्री को सबसे पहले अभी जो फसल कि बर्बादी हुयी है और इससे जो किसानों का नुकसान हुआ है उस पर ज्यादा जोर देना चाहिए था या उनको आश्वस्त करना चाहिए था इस मामले में भी युद्धस्तर पर कदम उठाये जायेंगे. मगर ऐसा होता नहीं है.
क्यों?
क्योंकि या तो प्रधानमंत्री तक ज़मीनी हालात कि सही जानकारी उनके सम्बंधित मंत्री और पार्टी के लोग पहुंचाते नहीं है और न ही राज्य स्तर पर उनकी पार्टी के मुख्य मंत्री, अन्य मंत्री,सांसद, विधायक और नेता कोई ऐसे कदम उठाते है जिससे लोगों को लगे कि उनकी बात ज़रूर सुनी जायेगी. और जब ऐसा नहीं होता है तो प्रधानमंत्री कितना भी कहे कि ‘आप मुझ पर विश्वास कीजिये’, लेकिन बात बनती नहीं है.
ये बात भी सही है कि लोकसभा चुनाओं में तमाम जनता ने अकेले उनकी ही बात पर उनकी पार्टी को प्रचंड बहुमत से जिताया, मगर इसके बाद एक एक कर जो जनता के साथ छलावा हो रहा है उससे लोगों का विश्वास अब डगमगा गया है.
ये भी सही है कि प्रधानमंत्री लाख चाहे तो भी हर काम वे अकेले नहीं कर सकते. और उनकी तमाम योजनाएं तभी सफल हो सकती है जब खुद उनके मंत्री, सांसद, विधायक और कार्यकर्ता उतनी ही गंभीरता और संजीदगी से हर काम को अंजाम दे और ज़मीनी समस्याओं को समझ कर सरकार और लोगों के बीच एक सकारात्मक ‘सेतु’ का काम करे.
सरकार को कई मुद्दों पर नए तरीके अपनाने होंगे और समय समय पर जो मुद्दे उभर के आते है जो कि जन-मानस से जुड़े हुए होते है, ऐसे मामलों में सरकार को एक नयी पहल कर युद्ध-स्तर पर निर्णय लेने चाहिए और जनता के बीच ‘विश्वास’ का सन्देश पहुँचाना चाहिए.
जैसे कि बलात्कार, देश कि सीमा पर हमला, आतंकवादी हमला, कोई बड़ी दुर्घटना और सबसे महत्वपूर्ण कोई प्राकृतिक आपदा जैसे मामलों में युद्धस्तर पर करवाई करनी होगी. ऐसे मामलों में और विशेष कर जहां किसान लगातार आत्महत्याएं कर रहें हो, उनके ऊपर क़र्ज़ बढ़ रहा हो और फसलें बर्बाद हो रही हो वहाँ तो आपको हर हाल में युद्धस्तर पर करवाई कर लोगों का हौसला बढ़ाना होगा और उनकी समस्याओं को दूर करना होगा.
लेकिन आज तक कोई भी सरकार न ऐसा करते आयी है न करना चाहती है. लेकिन ‘बदलाव’ कि जिस हवा का हवाला देकर यह सरकार बनी है उसे आज के ‘सोशल मिडिया’ वाले दौर में लोगों कि भावनाओं को समझ कर, हवा का रुख देख कर, राष्ट्रहित को ध्यान में रख कर उचित कदम उठाने होंगे ही और यह सब जल्दी भी करना होगा.
‘रिपोर्ट आएगी तब देखेंगे’ वाला रवैया बदलना होगा !!
यह बात भी सही है कि लोगों को अपनी बात कहने का मौका भी प्रधानमंत्री जी ने ही दिया है. आजतक किसी प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन कि बात’ इतनी बार लोगों से कि नहीं है.
लेकिन जब आप कुछ अच्छा करना चाहते है तो उसे संपूर्ण समर्पण से करना होगा और लोगों के ताने भी झेलने पड़ेंगे. अगर इस चर्चा को और ‘संवादात्मक’ बनाया जाता तो अच्छा होता. या किसानों को ही उनके द्वारा नियुक्त किये गए ‘प्रतिनिधि मंडल’ को इस चर्चा में शामिल किया जाता तो अच्छा होता.

आज कल ज्यादातर टीवी चैनल पर जो चर्चा होती है उसमे मुख्य ‘मुद्दों’ को भुलाकर आपसी विवाद कि स्थिति पैदा हो जाती और हर पार्टी के प्रवक्ता अपनी बात और काम को सही ठहराने में लगे रहते है, इससे सच कहीं बातों में उलझ कर रह जाता है और राजनीती असल मुद्दों को खा जाती है. तो फिर ‘सच’ और ‘झूठ’ का फैसला कौन करे. और जनता कि भलाई चाहनेवाला पक्ष कौनसा है यह कौन तय करेगा.
या तो फिर ‘मिडिया’ को ही कड़े शब्दों में सच जनता के सामने रखना चाहिए, और मुद्दों को ‘गोल-गोल’ बातों में और ‘आंकड़ों’ के जाल में उलझाकर न रखते हुए, वास्तविकता को जनता के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए.
और सरकार को भी ये ध्यान में रखना चाहिए कि देश के न.१ चैनल पर अगर जनता से ये आवाज़ आती है कि ‘प्रधानमंत्री’ झूठ बोलते है और झूठ ही बोलते रहे है तो फिर कहीं न कहीं ये असंतोष भविष्य के ‘चुनावों’ में सामने आएगा ही.

श्री.शिव छत्रपतींचा ३८५वा जयंती सोहळा !!!

मित्रांनो काही महिन्यांपूर्वी (म्हणजे गणेश उत्सवादरम्यान) मी ह्या ब्लॉगवर मराठीतला माझा पहिला लेख (ह्या ब्लॉगवर) लिहिण्याचे मनोगत व्यक्त केले होते. पण नंतर ते राहूनच गेले.
पण आज एका विशिष्ट दिवशी माझी इच्छा पूर्ण होत आहे.
आज ‘छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या’ ३८५ व्या जयंती निमित्त मी ह्या ब्लॉगवर हा पहिला ‘मराठी’ लेख (वृतांत) आपल्या समक्ष प्रस्तुत करीत आहे.
कृपया आपला अभिप्राय आणि सूचना अवश्य कळवाव्यात हि विनंती.

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आज १९ फेब्रुवारी २०१५ हा दिवस गुजरात मधील कच्छ येथील मुन्द्रा येथे वास्तव्य करणाऱ्या
मराठी बांधवांसाठी एक आनंदाचा आणि महत्वाचा दिवस ठरला.
आज पहिल्यांदा मुन्द्रा ह्या ठिकाणी श्री. छत्रपती शिवाजी महाराजांचा ‘जयंती’ उत्सव साजरा करण्यात आला.
मुन्द्रा इथे बरेच वर्षांपासून पुष्कळ मराठी बांधव नौकरी कामाच्या निमित्ताने स्थायिक झालेले आहेत आणि पुष्कळ जण तर इथेच स्थायिक सुद्धा झालेले आहेत.
सन २००५ ला पहिल्यांदा इथे ‘हिंगलाज नगर युवक मंडळ’ आणि ‘महाराष्ट्र मंडळाच्या’ वतीने सार्वजनिक गणेश उत्सव सुरु करण्यात आला. पण सलग पाच वर्ष सुरळीत पार पडल्यावर आणि काही लोकांच्या बदल्या झाल्यामुळे म्हणा किंवा कामाचा व्याप वाढल्यामुळे बरीचशी मंडळी विखुरल्या गेली आणि हळू हळू महाराष्ट्र मंडळाचा कारभार थंड पडत गेला.
पण सर्व मराठी बांधव आपल्या आपल्या परीने घरी आणि आप-आपल्या ‘सोसायटी’ मध्ये सर्वच सण वेळोवेळी साजरे करत आले.
असेच येथील एका ‘कलापूर्ण सोसायटी’ मध्ये राहणारे श्री. उदय पतंगराव (मूळ गाव- मुरबाड जिल्हा –ठाणे) यांनी पुढाकार घेऊन श्री.अष्टविनायक मंडळाची स्थापनी केली आणि दीड दिवसांचा गणपती ते साजरा करीत आले आहेत.
परदेशी राहून आपला ‘बाणा’ जपण्याचे कार्य सातत्याने बरेच जण करीत असतात. आणि आजच्या ह्या ‘स्व-प्रसिद्धीच्या’ युगात सुद्धा निस्वार्थपणे कार्य करणारे पण बरीच मंडळी असतात.
असेच एक व्यक्तिमत्व म्हणजे मूळ गाव- आटपाडी, जिल्हा-सांगली येथील आणि जवळपास ७/८ वर्षांपासुन मुन्द्रा इथे वास्तव्यास असलेले श्री.संतोष गायकवाड.
त्यांचा उत्साह आणि कार्य पाहून मला आनंद तर झालाच पण आश्चर्यहि वाटले. कारण पहिल्यांदा मी शिवाजी महाराजांची जयंती, हि घरात, एखाद्या सणा सारखी साजरी करताना पाहिले.

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गेले तीन वर्ष श्री. गायकवाड, श्री.उदय पतंगराव आणि श्री.संजय भोंसले हे शिवाजी जयंतीचा उत्सव श्री.गायकवाड ह्यांच्या घरी साजरी करीत होते.
श्री. शिवाजी महाराजांची जयंती, त्यांचा ‘राज्याभिषेक-दिन’ आणि महाराजांची ‘पुण्यतिथी’ ह्या तिन्ही दिवशी श्री.गायकवाड हे आपल्या घरी तोरण बांधून महाराजांच्या फोटो ला हार तुरे अर्पण करून आणि रणजीत देसाई यांची ‘श्रीमान योगी’, ‘छावा’ या कादंबऱ्यांना हळद कुंकू वाहून, हे दिवस साजरे करतात, आणि महाराजांचे स्मरण करून त्यांना आदरांजली वाहतात.
या वर्षी या तिघांनी मिळून आणि मुन्द्रा इथे लहानपणा पासून वाढलेले श्री.देवेंद्र निगडे (हिंगलाज युवक मंडळ आणि महाराष्ट्र युवा मंडळाचे कार्यकर्ते) यांच्या साथीने मुन्द्रा इथे ‘श्री.शिवाजी महाराजांच्या जयंती’ उत्सवाला सुरुवात केली.
आज सर्व मराठी बांधव तथा भगिनी सुद्धा यांनी एकत्र येऊन स्थानिक देवीच्या मंदिरात पूजा केल्यानंतर, मशाल यात्रा काढण्यात आली. आणि ठरल्या प्रमाणे स्थानिक क्षेत्रपाळ नगरात श्री.विष्णू नारेवाडकर यांच्या घरासमोर उभारण्यात आलेल्या मंडपात श्री.शिवाजी महाराजांची मूर्ती स्थापन करून पूजा करण्यात आली. (ऐनवेळी कार्यक्रम ठरल्यावर केवळ दोन-तीन दिवस हातात असताना सुद्धा खास मुंबईहून महाराजांची मूर्ती मागविण्यात आली)
महाराष्ट्रापासून शेकडो किलोमीटर दूर थेट पाकिस्तान च्या सीमेलगतच्या भागात कच्छ्-गुजरात मधे आज महाराजांचे पोवाडे, संताची भजने आणि ‘शिवाजी महाराज कि जय’, ‘जय भवानी-जय शिवाजी’ ह्या उदघोशानी आसमंत दुमदुमला.

!! शिवरायांचे आठवावे रूप !! शिवरायांचा आठवावा प्रताप !!

शिवाजी महाराज, लोकमान्य टिळक, ह्यांची नुसती नावे जरी घेतली तरी मराठी मने कशी  आनंदाने, स्वाभिमानाने फुलून येतात – आज त्याही पुढे जाऊन ती एकत्र आलीत आणि एक नवीन सुरुवात झाली.

सपनों का भारत !!!

सपनों का भारत हमारे
कैसा हो
कैसा हो
चारों तरफ खुशहाली हो
और लहराता तिरंगा हो !!

सपने जो सब देखे थे
वीर अमर शहीदों ने
भगत, बापू,सुभाष ने
और सारे भारतवासियों ने
पूरा कर उन सपनों कों
अपना फ़र्ज़ निभाना हो !! १ !!

बदलाव जो देश में आया है
मौका सुनहरा लाया है
जोश फिजाओं में नया है
मौका नहीं ये गंवाना हाँ
सबक पुरानी गलतियों से लेकर
एक नया भारत बनाना हो !! २ !!

भेद-भाव, लूट-पाट,
जात-पात,
जोर-ज़बरदस्ती और
फिरकापरस्ती कों,
पहचान लो गद्दारों कों
मिटा कर इन दुश्मनों कों
अत्याचारों को न सहना अब
नया सवेरा लाना हो !! ३ !!

सपनों का भारत हमारे
अब ऐसा ही हो के
चारों तरफ खुशहाली हो
और लहराता तिरंगा हो !!

 

Cleanliness Pledge

स्वच्छता शपथ
( स्वच्छ भारत – एक कदम स्वच्छता की ओर )

महात्मा गांधी ने जिस भारत का सपना देखा था उसमे सिर्फ राजनैतिक आज़ादी ही नहीं थी, बल्कि एक स्वच्छ एवं विकसित देश कि कल्पना भी थी !

महात्मा गांधी ने गुलामी कि जंजीरों कों तोड़कर माँ भारती कों आज़ाद कराया !

अब हमारा कर्तव्य है कि गंदगी कों दूर करके भारत माता कि सेवा करें !

मैं शपथ लेता हूँ कि मैं स्वयं स्वच्छता के प्रति सजग रहूँगा और उसके लिए समय दूंगा !

हर वर्ष १०० घंटे यानी हर सप्ताह २ घंटे श्रमदान करके स्वच्छता के इस संकल्प कों चरितार्थ करूँगा !

मैं न गंदगी करूँगा न किसी और कों करने दूंगा !

सबसे पहले मैं स्वयं से, मेरे परिवार से , मेरे मुहल्ले से, मेरे गाँव से एवं मेरे कार्यस्थल से शुरुआत करूँगा !
मैं यह मानता हूँ कि दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखतें हैं उसका कारण यह है कि वहाँ के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं !

इस विचार के साथ मैं गाँव-गाँव और गली-गली स्वच्छ भारत मिशन का प्रचार करूँगा !

मैं आज जो शपथ ले रहा हूँ, वह अन्य १०० व्यक्तियों से भी करवाऊंगा !

वे भी मेरी तरह स्वच्छता के लिए १०० घंटे दें, इसके लिए प्रयास करूँगा !

मुझे मालूम हैं कि स्वच्छता कि तरफ बढ़ाया गया मेरा एक कदम पूरे भारत देश कों स्वच्छ बनाने में मदद करेगा !

Cleanliness Pledge

(re-blogged  from Local Circles)

Jan Gan Mangal Daayak Yaan _ जन गण मंगल दायक यान

(Sharing herewith my thoughts on India’s successful Mars Orbit Mission (MOM) on 24.09.2014)

जन गण मंगल दायक यान
मंगल पर है अपना यान
मंगल
मंगल
मंगल यान
अमंगल हरता मंगल यान
जन गण मंगल दायक यान
मंगल पर है अपना यान

जग को दिया शून्य का ज्ञान
धन्य है भारत का विज्ञान
पूर्वजों का है वरदान
अंतरिक्ष कि दूरी आसान
मंगल कक्षा में मंगल यान
मंगल बेला में किया प्रयाण
जय जय जय हो मंगल यान
मंगल
मंगल
मंगल यान

जय जवान और जय किसान
जय जय जय जय जय विज्ञान
अंतरिक्ष में ली है उड़ान
लहराया है तिरंगा महान
लाल ग्रह पर अपने निशान
मंगल भुवन है मंगल यान

पुरुषार्थ का इनको है मान
अपने देश कि है ये शान
बढ़ाया भारत का सम्मान
कर्तव्य पूर्ति का है अभिमान
जन जन जिनका ऋणी हैं
ऐसे वैज्ञानिक महान
जन जन का ये स्वाभिमान

जन गण मंगल दायक यान
मंगल पर है अपना यान
मंगल
मंगल
मंगल यान

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Jan Gan Mangal Daayak Yaan
Mangal par hain apna Yaan
Mangal
Mangal
Mangal Yaan
‘Amangal’ hartaa mangal yaan
Jan Gan Mangal Daayak Yaan
Mangal par hain apna Yaan

Jag ko diya shoonya ka gyaan
Dhanya hai Bharat ka vigyaan
Purvajon ka hai vardaan
Antariksh ki doori aasaan
Mangal kaksha mein Mangal yaan
Mangal bela mein kiya prayaan
Jai jai jai ho Mangal yaan
Mangal
Mangal
Mangal Yaan

Jai jawaan aur jai kisaan
Jai jai jai jai jai vigyaan
Antariksh mein lee hai udaan
Lehraaya hai tirangaa mahaan
Laal grah par apne nishaan
Mangal bhuwan hai Mangal yaan

Purushaarth ka inko hai maan
Apne desh ki ye hai shaan
Badhaaya Bharat ka sammaan
Kartavya purti ka hai abhimaan
Jan jan jink wruni hain
Aise vaigyanik mahaan
Jan jan ka ye swaabhimaan

Aah! Those days….. Memories forever

(This post is by Jeegar Modi)

Where are those days, the happiness, the joy, the sorrow, the good times and the bad times, they are stored as beautiful memories of our life.
At times it becomes just dark memories as the time passes, where there is lack of light to see them.
Those spark of light that just flashes for a moment and goes back and does not return for a long time. And those moments which don’t return again forever throughout the life time.

It is because of the busy life, people are busy making money and busy looking of temporary happiness which does not create conceit memories of our life. We look out for happiness in bigger things, than looking out for happiness in small little things which is always around us.
To achieve those bigger things of life people go mad with their life forgetting the importance of humanity. It is hard to live in such an environment.
It is also hard to forget those people in our life who have given us beautiful memories to keep it with us safely. Some memories are forgotten after a period of time, but some stay with us forever.
Those forever memories can be recalled during the hard times of life, when life is full of darkness and sorrow. Those peoples may be alive or dead but they are always alive in our memories.

At times we may have bad memories in our life which helps us to understand our difficulties and to change our self accordingly. They teach us what life is, they show us our strengths and weaknesses. They even help us to realize our mistakes and they also help us to correct it.
They transform us to a new being. But not everyone does it in such a way because they don’t make efforts to correct it or they don’t reason it out. Once they do it life takes a turn towards happiness and goodness. They transform you to a good being.
This makes you different from others. Some kill their good memories due to hate rate. But some keep them alive no matter whatever happens.

Memories of our own mistakes make us laugh at our own self, some memories makes us cry due to the previous people who where there whenever we needed them but now they are no more. They just live in our memories and our heart.
Their teachings always flashes when we make a mistake or when we are about to make a mistake, their laughter or smile flashes whenever we are sad or sorrow. We feel their presence whenever we feel lonely. These are memories which keep us alive…

बाज़ार, व्यापार और गणतंत्र !

हम एक ‘गणतंत्र’ है
हमारा ‘अपना’ एक ‘मंत्र’ है,
हमारी अपनी ‘संस्थाओं’ के प्रति
हमारी ‘बेरूखी’ ‘अनोखी’ है,
इसीलिए देश में जो कुछ होता है
उसमे ‘अपने बाप का क्या जाता है’
‘होने दो जो होता है’
‘कौन किसके लिए रोता हैं’
‘यार सब चलता हैं’…

‘आबादी’ बढती है
‘नए शहर’ ‘पैदा’ होते हैं
‘ज़मीन’ के भाव कुलांचे मारते है
‘कंक्रीट-जंगल’ के दलाल खुश होते है,
‘रंग-बिरंगी’ सपने और
‘खोखली-जगमगाहट’ के ‘काम्प्लेक्स’ में
‘पर्यावरण’ और ‘प्रदुषण’ जैसे मुद्दे
‘फाइलों’ कि तरह गायब हो जाते है,
‘राजनीति’ इसीको ‘विकास’ कहती है

पर ‘कुदरत’ कहाँ
‘भेद’ करती है,
‘आपदा’ आती है
‘शहर’ डूब जाते हैं
‘इंसानियत’ ढूँढने से नहीं मिलती और
‘नीति-मूल्यों’ कि रूहें कांपती है,
‘लाचारी’ कों ‘बाज़ार’ निगलता है
रोते-बिलखते ‘मासूम’ ‘बिसात’ पर है
‘जिंदगी’ दम तोड़ रही है,
‘शेयर-बाजार’ में ‘सूचकांक’ बढ़ रहा है …