आरक्षण … (Reservations Unlimited!!)

(My old post of 06.08.2011 (then published on nai-aash.in  ) being re-blogged today)

आरक्षण का ज़ोर है, आरक्षण का शोर है,
आरक्षण का देश हमारा, आरक्षण चहुँ ओर है,
‘आरक्षण’ चाहे तो करवा दे ‘चक्का जाम’,
आरक्षण के बिना नहीं चलती यहाँ ‘सरकार’ तमाम,
यह ‘दान’ है या ‘वरदान’, नहीं जानता मैं,
पर दे दो मुझे भी ‘आरक्षण’ लो आज मांगता हूँ मैं,
मेरी ‘सूची’ चाह कर भी ‘छोटी’ नहीं होती,
‘आरक्षण’ चीज़ ही ऐसी है कि ‘लालसा’ मेरी ‘कम’ नहीं होती,

क्या नहीं मिल सकता आरक्षण ‘अन्न’ का उनके लिए,
जिन्हें नहीं है नसीब दो वक्त की रोटी भी,
क्यों न कर दे रोज़गार आरक्षित बेरोजगारों के लिए,
और ‘सहारे’ कर दे आरक्षित ‘अनाथ’ बच्चों के लिए,
दे आरक्षण महिलाओं को शोषण और हिंसा से,
बचाएं बालिकाओं को छेडछाड और दहशत से,
‘कोमल’ सपनों को ‘बचालें’ ’रैगिंग’ के ‘दानव’ से,
हर जख्मी को मिले उपचार का आरक्षण,
‘न्याय’ रहे आरक्षित बेगुनाह और पीड़ित के लिए,

आओ कर दें हम आरक्षित इस देश के लिए,
सच्चे नागरिक,सत्यप्रिय और ईमानदार जन सेवकों को,
बहादुर-जांबाज़ सिपाहियो के लिए सम्मान को और
उनके परिवार जनोंके लिए समाज में गौरव को,
देश को रखे दूर ढोंगी-स्वार्थी -भ्रष्ट नेताओं से,
रहे सतर्क हमेशा लालची राजनीतिक पार्टियों से,
हम समाज को दें ‘हिंसा-मुक्ति’ का आरक्षण ,
रखे सुरक्षित इसे लूट-अपहरण-डकैती-बलात्कार से,
और जनता को बचाएं,आतंकवाद तथा दुर्घटनाओं से,

इस पूरी प्रणाली को बचाएं नपुंसक नाकारा लोगों से,
आओ इस धरा को रखे सुरक्षित प्रदुषण के खतरों से,
इंसानियत को दे आरक्षण सदभाव और प्रेम का,
‘सामान्य जन’ को दे आरक्षण ‘जीवन’ और ‘विश्वास’ का,
आशा को मिले विश्वास का, विश्वास को श्रद्धा का,
श्रद्धा को समर्पण और समर्पण को सम्मान का,
विकास को समृद्धि और समृद्धि को प्रगति का,गर मिले आरक्षण
– नहीं होगी इस पर कोई ‘राजनीती’ जब,
सही मायनों में सफल होगा ‘आरक्षण’.. तब !

Whatever Happens – Jo bhi hota hai

Is so called ‘complicated’ ‘life’ mein
Insaan na jaane
Kitni baar ‘rota’ hai
But, at the end
Ye zaroor samajh jaata hai,
Ki jo hota hai achchhe ke liye hota hai
‘Future’ ko chhod kar
‘Past’ pe concentrate
And
‘Past’ ko ‘Present’ mein yaad kar ke
All time ‘frustrated’ rehta hai
But itni ‘frustration’ mein agar
Ek bhi ‘positive’ point mil jaaye
To ye zaroor feel hota hai
Ki jo hota hai
‘Achchhe ke liye hota hai’
Agar puri ho bhi jaaye
Iski ‘puraani wishes’
Then ye ‘nayi wish’ mein
Puraani ‘bhool’ jaata hai
But
Jab ‘attention’ jaata hai
Ki ‘at least’ ‘puraani wish’ to
Puri huyee na yaar
Tab ‘mind’ mein ‘click’ hota hai
Ki jo hota hai
‘Achchhe ke liye hota hai’