दोस्त

लाते है जो चहेरों पर प्यार भरी मुस्कान
रहते है जो दिलके करीब हर बार
क्युं ले आती हो खुशीयोंकी बहार
ऐसे ही हो तुम मेरी यार

2 thoughts on “दोस्त”

  1. वाह … क्या बात है

    दोस्ती से बडी कोइ जागीर नहिं
    इस से अच्छी तसवीर नहिं
    एक नाज़ुक प्रेमका धागा है
    फिरभी इससे अच्छी कोइ ज्ञंज्ञीर नहिं

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