जन गण मन !!!

आज प्रधानमंत्री ने किसानों से अपने मन कि बात कही. विशेष कर उन्होंने भूमि अधिग्रहण कानून सम्बन्धी कुछ ‘भ्रम’(जो चर्चा में है) दूर करने कि कोशिश कि और किसानों से आग्रह किया कि वे उन पर विश्वास करें और इस कानून का समर्थन करें.
ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री जी ने केवल यही बात की. उन्होंने हाल ही में हुयी बे-मौसमी बारिश और ओला वृष्टि से हुयी फसल कि बर्बादी को लेकर भी चिंता जताई एवं अपने सम्बंधित मंत्रीयों से इस बारे में कही गयी कारवाई का भी हवाला दिया.
लेकिन, कुछ प्रमुख टीवी समाचार चैनलों पर जिस तरह कि चर्चाएं इस ‘मन कि बात’ को लेकर हुयी और उसमे जो किसानों कि प्रतिक्रियाएं आयी, उससे साफ़ हो गया कि इस ‘मन कि बात’ को लेकर लोगों में और विशेष कर किसानों में निराशा का माहौल बना दिया.
या तो प्रधानमंत्री को सबसे पहले अभी जो फसल कि बर्बादी हुयी है और इससे जो किसानों का नुकसान हुआ है उस पर ज्यादा जोर देना चाहिए था या उनको आश्वस्त करना चाहिए था इस मामले में भी युद्धस्तर पर कदम उठाये जायेंगे. मगर ऐसा होता नहीं है.
क्यों?
क्योंकि या तो प्रधानमंत्री तक ज़मीनी हालात कि सही जानकारी उनके सम्बंधित मंत्री और पार्टी के लोग पहुंचाते नहीं है और न ही राज्य स्तर पर उनकी पार्टी के मुख्य मंत्री, अन्य मंत्री,सांसद, विधायक और नेता कोई ऐसे कदम उठाते है जिससे लोगों को लगे कि उनकी बात ज़रूर सुनी जायेगी. और जब ऐसा नहीं होता है तो प्रधानमंत्री कितना भी कहे कि ‘आप मुझ पर विश्वास कीजिये’, लेकिन बात बनती नहीं है.
ये बात भी सही है कि लोकसभा चुनाओं में तमाम जनता ने अकेले उनकी ही बात पर उनकी पार्टी को प्रचंड बहुमत से जिताया, मगर इसके बाद एक एक कर जो जनता के साथ छलावा हो रहा है उससे लोगों का विश्वास अब डगमगा गया है.
ये भी सही है कि प्रधानमंत्री लाख चाहे तो भी हर काम वे अकेले नहीं कर सकते. और उनकी तमाम योजनाएं तभी सफल हो सकती है जब खुद उनके मंत्री, सांसद, विधायक और कार्यकर्ता उतनी ही गंभीरता और संजीदगी से हर काम को अंजाम दे और ज़मीनी समस्याओं को समझ कर सरकार और लोगों के बीच एक सकारात्मक ‘सेतु’ का काम करे.
सरकार को कई मुद्दों पर नए तरीके अपनाने होंगे और समय समय पर जो मुद्दे उभर के आते है जो कि जन-मानस से जुड़े हुए होते है, ऐसे मामलों में सरकार को एक नयी पहल कर युद्ध-स्तर पर निर्णय लेने चाहिए और जनता के बीच ‘विश्वास’ का सन्देश पहुँचाना चाहिए.
जैसे कि बलात्कार, देश कि सीमा पर हमला, आतंकवादी हमला, कोई बड़ी दुर्घटना और सबसे महत्वपूर्ण कोई प्राकृतिक आपदा जैसे मामलों में युद्धस्तर पर करवाई करनी होगी. ऐसे मामलों में और विशेष कर जहां किसान लगातार आत्महत्याएं कर रहें हो, उनके ऊपर क़र्ज़ बढ़ रहा हो और फसलें बर्बाद हो रही हो वहाँ तो आपको हर हाल में युद्धस्तर पर करवाई कर लोगों का हौसला बढ़ाना होगा और उनकी समस्याओं को दूर करना होगा.
लेकिन आज तक कोई भी सरकार न ऐसा करते आयी है न करना चाहती है. लेकिन ‘बदलाव’ कि जिस हवा का हवाला देकर यह सरकार बनी है उसे आज के ‘सोशल मिडिया’ वाले दौर में लोगों कि भावनाओं को समझ कर, हवा का रुख देख कर, राष्ट्रहित को ध्यान में रख कर उचित कदम उठाने होंगे ही और यह सब जल्दी भी करना होगा.
‘रिपोर्ट आएगी तब देखेंगे’ वाला रवैया बदलना होगा !!
यह बात भी सही है कि लोगों को अपनी बात कहने का मौका भी प्रधानमंत्री जी ने ही दिया है. आजतक किसी प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन कि बात’ इतनी बार लोगों से कि नहीं है.
लेकिन जब आप कुछ अच्छा करना चाहते है तो उसे संपूर्ण समर्पण से करना होगा और लोगों के ताने भी झेलने पड़ेंगे. अगर इस चर्चा को और ‘संवादात्मक’ बनाया जाता तो अच्छा होता. या किसानों को ही उनके द्वारा नियुक्त किये गए ‘प्रतिनिधि मंडल’ को इस चर्चा में शामिल किया जाता तो अच्छा होता.

आज कल ज्यादातर टीवी चैनल पर जो चर्चा होती है उसमे मुख्य ‘मुद्दों’ को भुलाकर आपसी विवाद कि स्थिति पैदा हो जाती और हर पार्टी के प्रवक्ता अपनी बात और काम को सही ठहराने में लगे रहते है, इससे सच कहीं बातों में उलझ कर रह जाता है और राजनीती असल मुद्दों को खा जाती है. तो फिर ‘सच’ और ‘झूठ’ का फैसला कौन करे. और जनता कि भलाई चाहनेवाला पक्ष कौनसा है यह कौन तय करेगा.
या तो फिर ‘मिडिया’ को ही कड़े शब्दों में सच जनता के सामने रखना चाहिए, और मुद्दों को ‘गोल-गोल’ बातों में और ‘आंकड़ों’ के जाल में उलझाकर न रखते हुए, वास्तविकता को जनता के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए.
और सरकार को भी ये ध्यान में रखना चाहिए कि देश के न.१ चैनल पर अगर जनता से ये आवाज़ आती है कि ‘प्रधानमंत्री’ झूठ बोलते है और झूठ ही बोलते रहे है तो फिर कहीं न कहीं ये असंतोष भविष्य के ‘चुनावों’ में सामने आएगा ही.

आया मौसम ‘सीसीटीवी’ का …

कूड़ा – करकट
(हमारे समाज का आइना)

… आया मौसम ‘सीसीटीवी’ का …

दोस्तों, यह लेख मैंने कई महीनों पहले लिखा था जब बार बार ‘सीसीटीवी’ कि चर्चा कुछ न कुछ बहाने से सुर्ख़ियों में थी. फिर कुछ कारणवश मैं इसे पोस्ट नहीं कर पाया.
तब ऐसी घटना घटी थी जब एक इंसान ने खुदकशी कि और वक्त रहते अगर सुरक्षा कर्मी ‘सीसीटीवी’ कि ‘फूटेज’ कि निगरानी कर रहे होते तो शायद इस शख्स को बचाया भी जा सकता था.

यह लेख भी मैंने अपने तरीके से सरल भाषा में लिखा है ताकि सामान्य जनता पर या ‘आम –आदमी’ पर इससे कोई और अधिक ‘बोझ’ न बढे !! क्योंकि आम आदमी अपनी रोज़मर्रा कि जिंदगी से ही इतना थक जाता है कि उसके बाद के समय में वह कोई भी अतिरिक्त कार्य (चाहे वह देशहित में ही क्यों न हो, करने हा हौसला नहीं जुटा पता है).

अब देश में फिर से ‘सिसिटीवी’ का ‘मौसम’ उफान पर है. कई जगह ‘सीसीटीवी’ लगाए जा रहे है. कई जगहों पर लगाने का विचार हो रहा है – केंद्र स्तर पर- दिल्ली में- अलग अलग राज्यों में – जहाँ नयी सरकारें आयी है वहाँ पर, इत्यादि.
(इसका मतलब यह भी निकाला जा सकता है कि ‘करोड़ों’ रुपयों का बजट इसके लिए आवंटित किया गया होगा, निविदाएँ मंगाई गयी होंगी, ठेके (?) दिए जा रहे होंगे या ठेकों कि नीलामी कि जा रही होंगी, या फिर ‘ऑन-लाइन’ प्रक्रिया चल रही होंगी. हम चाहे तो कुछ भी कयास लगा सकते है)

हमने ऐसा भी देखा है कि कभी-कभी ‘सीसीटीवी’ का जिक्र होता है तो आँखों के सामने एक नाकाम ‘कैमरे’ कि तस्वीर उभर आती है. क्योंकि हर समय यही सुनने को मिलता है कि ‘सीसीटीवी’ तो लगा हुआ था पर वह काम नहीं कर रहा था! तो क्या सीसीटीवी को भी ऑफिस-ऑफिस जैसी कोई बीमारी लग गयी है कि वह कुछ लेन-देन के बाद ही काम करेगा. या फिर हमने हजारों – लाखों रुपये खर्च कर इन कैमरों को लगवाया ही क्यों है?
इस सीसीटीवी को मुए को शर्म भी नहीं आती है, लोग जान से चले जाते है, पर यह हिलता ही नहीं है, देश कि सुरक्षा तक खतरे मे पड़ जाती है आम आदमी कि तो बात ही क्या?
और हम केवल सीसीटीवी के भरोसे है, अगर कोई इसे जान-बूझकर’ चलने नहीं देता है तो भी इसे अपने आप कभी कभार एक चमत्कार के रूप में काम करने में क्या फर्क पड़ता है, क्योंकि इसमें कैद हुई तस्वीरों से ही तो हमें कुछ सुराग मिलेंगे वर्ना दिखावे के लिए तो हमारी पुलिस झूठ-मूठ कुछ तो छापेमारी करेगी ही,
वैसे भी पहले जब सीसीटीवी नहीं था तो क्या मामले सुलझते ही नहीं थे, हाँ यह अलग बात है कि ज्यादातर मामलों में बाहरी ताकतों के होने का तर्क दिया जाता था और अगर कोई गुनाहगार पकड़ा भी जाए तो क्या? कानून के ढीले ढाले पेंच उसकी सलामती के कई रास्ते अपने आप खोल देते है ताकि गुनाह करनेवालों के हौंसले और बुलंद हो और वो संगीन से संगीन अपराध करने कि हिमाकत कर सके, इसी का नाम तो भारतीय लोकतंत्र है, और ‘टालरेंस’ भी हमारा गज़ब का है , हर चीज बर्दाश्त कर लेते है…
हाँ हाँ , वही… सहिष्णुता , फर्गिवेनेस .. क्षमा.. ‘क्षमादान सबसे ऊपर है’,
यह सब सब कहते सुनते ही तो हमने गांधीजी के ‘तीन बंदरों’ को अपनी नाकामी कि ढाल बना दिया है, कैसे? ..
ऐसे जनाब- हर गुनाह से , सामाजिक बुराइयों से हमने आँख मूंद ली है- चाहे हमारे सामने कितना भी बुरा घटित हो रहा हो- ‘ हम कुछ देखते ही नहीं है’- मैंने देखा नहीं’ ,
विकास और वैश्वीकरण के शोर मे किसी कि चीख पुकार भी हमें सुनाई नहीं देती है- मैंने सुना नहीं’, और अन्याय चाहे कितना भी हो रहा हो, हमारे में अब बोलने कि हिम्मत रही ही नहीं – सब चलता है, अपने बाप का क्या जाता है, मजबूरी का नाम … हम है- जी हाँ – एक आम भारतीय आदमी, किसी और का नाम बदनाम करने से क्या फायदा?,
तो यह है हमारा तीसरा पहलु- ‘मैंने बोला नहीं’

तो फिर से ‘सीसीटीवी’ कि कार्य प्रणाली पर लौटते है. सरकार ने जहां भी जनता का पैसा खर्च कर ये
‘सीसीटीवी’ लगाए हैं , जहां ये बंद पड़े हैं – उन्हें चालु कराया जाय, जहां चल रहे है वहाँ पर इनकी फूटेज कि निगरानी करने वालों को सतर्क किया जाए, क्योंकि कब कहाँ क्या होगा इसका अनुमान लगाया नहीं जा सकता इसलिए सतर्कता जरुरी है. और जिनके जिम्मे इसका पूरा कार्यभार है वहाँ पर जवाबदेही तय कर इसकी कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाया जाए और इसको सख्ती से लागू किया जाए.
लेखक कि प्रार्थना है कि सरकार लगाए गए ‘सीसीटीवी’ कि ‘कार्यप्रणाली’ निश्चित करें ताकि जनता को और सभी को इसका लाभ मिल सके. सभी जगहों पर ये सीसीटीवी बिना रुकावट के चलते रहे और कानून कि मदद करते रहे. और इन सीसीटीवी को लगाने पर जो ‘जनता’ का ‘पैसा’ लगाया गया है उसका लाभ ‘राष्ट्र’ को और ‘जनता’ को मिले. जान हानि को बचाया जाए, राष्ट्र और राष्ट्रीय राष्ट्रीय संपत्ति कि रक्षा कि जा सके.
और जनता भी अपनी जागरूकता से इन ‘सीसीटीवी’ कि रक्षा करे ताकि कोई असामाजिक तत्त्व इनको नुक्सान न पंहुचा सके और ‘राष्ट्रीय-संपत्ति’ कि हानि को टाला जा सके.

(नोट – सुर्ख़ियों में है कि कुछ जगहों पर ‘एल-ई-डी’ ‘बल्ब’ लगाने या बदलने के कार्य में भी कुछ अनियमितताएं पायी गयी है … जय हो !!)

श्री.शिव छत्रपतींचा ३८५वा जयंती सोहळा !!!

मित्रांनो काही महिन्यांपूर्वी (म्हणजे गणेश उत्सवादरम्यान) मी ह्या ब्लॉगवर मराठीतला माझा पहिला लेख (ह्या ब्लॉगवर) लिहिण्याचे मनोगत व्यक्त केले होते. पण नंतर ते राहूनच गेले.
पण आज एका विशिष्ट दिवशी माझी इच्छा पूर्ण होत आहे.
आज ‘छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या’ ३८५ व्या जयंती निमित्त मी ह्या ब्लॉगवर हा पहिला ‘मराठी’ लेख (वृतांत) आपल्या समक्ष प्रस्तुत करीत आहे.
कृपया आपला अभिप्राय आणि सूचना अवश्य कळवाव्यात हि विनंती.

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आज १९ फेब्रुवारी २०१५ हा दिवस गुजरात मधील कच्छ येथील मुन्द्रा येथे वास्तव्य करणाऱ्या
मराठी बांधवांसाठी एक आनंदाचा आणि महत्वाचा दिवस ठरला.
आज पहिल्यांदा मुन्द्रा ह्या ठिकाणी श्री. छत्रपती शिवाजी महाराजांचा ‘जयंती’ उत्सव साजरा करण्यात आला.
मुन्द्रा इथे बरेच वर्षांपासून पुष्कळ मराठी बांधव नौकरी कामाच्या निमित्ताने स्थायिक झालेले आहेत आणि पुष्कळ जण तर इथेच स्थायिक सुद्धा झालेले आहेत.
सन २००५ ला पहिल्यांदा इथे ‘हिंगलाज नगर युवक मंडळ’ आणि ‘महाराष्ट्र मंडळाच्या’ वतीने सार्वजनिक गणेश उत्सव सुरु करण्यात आला. पण सलग पाच वर्ष सुरळीत पार पडल्यावर आणि काही लोकांच्या बदल्या झाल्यामुळे म्हणा किंवा कामाचा व्याप वाढल्यामुळे बरीचशी मंडळी विखुरल्या गेली आणि हळू हळू महाराष्ट्र मंडळाचा कारभार थंड पडत गेला.
पण सर्व मराठी बांधव आपल्या आपल्या परीने घरी आणि आप-आपल्या ‘सोसायटी’ मध्ये सर्वच सण वेळोवेळी साजरे करत आले.
असेच येथील एका ‘कलापूर्ण सोसायटी’ मध्ये राहणारे श्री. उदय पतंगराव (मूळ गाव- मुरबाड जिल्हा –ठाणे) यांनी पुढाकार घेऊन श्री.अष्टविनायक मंडळाची स्थापनी केली आणि दीड दिवसांचा गणपती ते साजरा करीत आले आहेत.
परदेशी राहून आपला ‘बाणा’ जपण्याचे कार्य सातत्याने बरेच जण करीत असतात. आणि आजच्या ह्या ‘स्व-प्रसिद्धीच्या’ युगात सुद्धा निस्वार्थपणे कार्य करणारे पण बरीच मंडळी असतात.
असेच एक व्यक्तिमत्व म्हणजे मूळ गाव- आटपाडी, जिल्हा-सांगली येथील आणि जवळपास ७/८ वर्षांपासुन मुन्द्रा इथे वास्तव्यास असलेले श्री.संतोष गायकवाड.
त्यांचा उत्साह आणि कार्य पाहून मला आनंद तर झालाच पण आश्चर्यहि वाटले. कारण पहिल्यांदा मी शिवाजी महाराजांची जयंती, हि घरात, एखाद्या सणा सारखी साजरी करताना पाहिले.

गेले तीन वर्ष श्री. गायकवाड, श्री.उदय पतंगराव आणि श्री.संजय भोंसले हे शिवाजी जयंतीचा उत्सव श्री.गायकवाड ह्यांच्या घरी साजरी करीत होते.
श्री. शिवाजी महाराजांची जयंती, त्यांचा ‘राज्याभिषेक-दिन’ आणि महाराजांची ‘पुण्यतिथी’ ह्या तिन्ही दिवशी श्री.गायकवाड हे आपल्या घरी तोरण बांधून महाराजांच्या फोटो ला हार तुरे अर्पण करून आणि रणजीत देसाई यांची ‘श्रीमान योगी’, ‘छावा’ या कादंबऱ्यांना हळद कुंकू वाहून, हे दिवस साजरे करतात, आणि महाराजांचे स्मरण करून त्यांना आदरांजली वाहतात.
या वर्षी या तिघांनी मिळून आणि मुन्द्रा इथे लहानपणा पासून वाढलेले श्री.देवेंद्र निगडे (हिंगलाज युवक मंडळ आणि महाराष्ट्र युवा मंडळाचे कार्यकर्ते) यांच्या साथीने मुन्द्रा इथे ‘श्री.शिवाजी महाराजांच्या जयंती’ उत्सवाला सुरुवात केली.
आज सर्व मराठी बांधव तथा भगिनी सुद्धा यांनी एकत्र येऊन स्थानिक देवीच्या मंदिरात पूजा केल्यानंतर, मशाल यात्रा काढण्यात आली. आणि ठरल्या प्रमाणे स्थानिक क्षेत्रपाळ नगरात श्री.विष्णू नारेवाडकर यांच्या घरासमोर उभारण्यात आलेल्या मंडपात श्री.शिवाजी महाराजांची मूर्ती स्थापन करून पूजा करण्यात आली. (ऐनवेळी कार्यक्रम ठरल्यावर केवळ दोन-तीन दिवस हातात असताना सुद्धा खास मुंबईहून महाराजांची मूर्ती मागविण्यात आली)
महाराष्ट्रापासून शेकडो किलोमीटर दूर थेट पाकिस्तान च्या सीमेलगतच्या भागात कच्छ्-गुजरात मधे आज महाराजांचे पोवाडे, संताची भजने आणि ‘शिवाजी महाराज कि जय’, ‘जय भवानी-जय शिवाजी’ ह्या उदघोशानी आसमंत दुमदुमला.

!! शिवरायांचे आठवावे रूप !! शिवरायांचा आठवावा प्रताप !!

शिवाजी महाराज, लोकमान्य टिळक, ह्यांची नुसती नावे जरी घेतली तरी मराठी मने कशी  आनंदाने, स्वाभिमानाने फुलून येतात – आज त्याही पुढे जाऊन ती एकत्र आलीत आणि एक नवीन सुरुवात झाली.

Silence Speaks ..!!

This Silence is much more pleasing
Much more healing to the Scars
That the Sound left away…

There is nothing to See
Nothing to Say
Just the Universal language
Speaks it Loud,
It says that there is a World
Far beyond

Beyond the Right and Wrong
Of this World,
A World which discriminates none
And takes all as One…

A World beyond the Real and Fake,
Where nothing needs to be Given and
Nothing to Take…

सपनों का भारत !!!

सपनों का भारत हमारे
कैसा हो
कैसा हो
चारों तरफ खुशहाली हो
और लहराता तिरंगा हो !!

सपने जो सब देखे थे
वीर अमर शहीदों ने
भगत, बापू,सुभाष ने
और सारे भारतवासियों ने
पूरा कर उन सपनों कों
अपना फ़र्ज़ निभाना हो !! १ !!

बदलाव जो देश में आया है
मौका सुनहरा लाया है
जोश फिजाओं में नया है
मौका नहीं ये गंवाना हाँ
सबक पुरानी गलतियों से लेकर
एक नया भारत बनाना हो !! २ !!

भेद-भाव, लूट-पाट,
जात-पात,
जोर-ज़बरदस्ती और
फिरकापरस्ती कों,
पहचान लो गद्दारों कों
मिटा कर इन दुश्मनों कों
अत्याचारों को न सहना अब
नया सवेरा लाना हो !! ३ !!

सपनों का भारत हमारे
अब ऐसा ही हो के
चारों तरफ खुशहाली हो
और लहराता तिरंगा हो !!

 

‘किरमिच’ … ( ‘Canvas of Life’ )

समय कि कूंची चली है
यादों के दृश्य बिखरे है
जिंदगी के ‘किरमिच’ पर
आज कई रंग उभरे है

रंगीन कुछ
कुछ काले,
कुछ निखरे
कुछ धुन्धलाये
लेकिन सब ऐसे, जैसे
दिल खोल के जी आये

कई जज़्बात इनमे बोल रहे है
रिश्तों कि कहानियां कह रहे है
उम्र के पड़ाव इनमे झलक रहे है
हर दौर का हिसाब मांग रहे है

मेरे तब का मैं
और मेरे अब का मैं
दोनों आमने सामने है
सवाल भी मैं
और जवाब भी मैं
फिर भी उलझनें बाकी है

लगता है एक उम्र गुज़र गयी
कभी लगता है कि
अभी तो जिंदगी शुरू हुई,

या फिर कट चुकी है आधी
और बाकी है आधी,
‘चितकबरी’‘किरमिच’
टंगी हुई दीवार पर

हौसला

पेंच उलझते जा रहे थे
मुश्किलें बढती जा रही थी
बर्दाश्तगी छटपटाने लगी थी
सांस घुंटने लगी थी
लगता था जैसे हर मोड पर
साज़िश शतरंज बिछाये है,

मैं दांव चल नहीं रहा था
और वो जीत कि ग़लतफहमी में थे
मैं गिरती इंसानियत देख रहा था
वो गुलाम कि अकड पर हैरान थे,

हाँ, आखिर, थे तो हम गुलाम ही ,

मैं मुट्ठी भर भर हिम्मत जुटा रहा था
सपने तिनका तिनका फिसल रहे थे
मैं परबत परबत हौसला जुटाने लगा
सपनों के महल डगमगाने लगे
मायूसी रोज़मर्रा हो गयी
बार बार जो वो मेरे वजूद कों ठुकराने लगे

लेकिन, यही वक्त था कि,
मैंने सीने में हौसला भर लिया
और ‘बगावत’ कर ली
उनकी मालिकियत ठुकरा के
अपनी जिंदगी, अपने नाम कर ली

The moment

In the Midst of chaos all over,
But somewhere the silence surrounds,
Making seem everything still,
Making each Moment for now to be drowned…
Drowned in the touch
That the soul felt before,
Drowned in the memories
Making feel alive each time more…

It’s like everything at this moment
Says a lot,
But got no word for now to speak,
It’s like the feelings are quite intense
Making the warmth around to be bleak…

The heartbeats are felt just too loud,
There is hollowness deep inside,
Making the silence grow deeper
Making feel as if the heart never cried…

Music and Life : Geet Gaataa Chal …

Music for all of us is a part of our life, or should I say it is ‘religion’ for all of us, or may be more than that.
It is also a positive force that keeps us going and a good healer too.

It may not be everything for us; still it is there with all aspects of our life.

And above all it is‘worship’ for those who love music and those who are connected with it in some other way.

So, in our offerings of prayers to the goddess ‘Saraswati’ I sincerely wish that as long as I live and continue this journey of life, ‘music’ is there with me at every moment and the journey be eternal musical forever …

***

All of us love music and we are attached to it for various reasons. For me, it is an ongoing activity which rules my sub-conscious and conscious mind every time.
It motivates me a lot. It acts like an inspirational force for me.

It has been almost since my childhood that I was addicted to Radio for listening songs and as I grow, that continued and the addiction also grows more with collection of cassettes, now collection CDs, getting done recording of songs, searching for rare songs etc etc.

So, music is always there with me in my day to day life.

***

When I was a bachelor the ‘mono cassette recorder’ with me use to start early morning, in fact I used to rise from bed straight to put on a cassette to play (starting with ‘bhupaali’/devotionals, and then moving for brush and tea preparation.
Then, till I left for office it continued to play and when I came back from office I start the music till I go to bed. The cassette player has to be auto stopped (usually) as I go to sleep while listening to the songs/albums for that day.

Then, as I joined distance education and use to study and do assignments at home, I use to listen to music during breaks of my study or when I wish to take some jigs on my favorite songs. (To ‘unwind’ as they put up nowadays).

***

After getting active with Atul ji’s blog, it has become my daily routine to share some songs either on daily basis. If not sharing, preparing for the songs to be shared, or searching for the songs that are in my memory since years back and while searching if I find something new (in our case the terminology is ‘old and rare’) then sharing them.
So music is continuously going on in my mind.

At work also whenever I get break or time to think during intervals I am thinking of songs that are yet to make to the blog.

Further in today’s stressful life we face many different situations time to time , a music lover like me always finds songs to face the situations, get out of it – if it is a troubled situation or enjoy and celebrate or cheer – if it something positive happening or getting succeeded in any assigned task (of work or of personal interest).

***

Few months back, we have to rush to a place about 475 kms away from my base station, as my elder daughter was hospitalized due to sudden illness. When she was hospitalized and her colleagues were with her (and she was out of danger), instead of starting instant, as it was already 9 PM, and I was still in travel back from my office, we decided to move on early morning next day. So I get time to take all my favorite albums with me.
However on the first day the ‘music system’ was under the control of by my younger daughter so we have to listen to mostly the newer songs.

The next two days were more hectic and there was no scope to listen the songs, though prayers were going on in our mind. After my elder daughter was discharged from hospital, my wife and younger daughter accompany her and stay at her Hostel room to give support.
When everything was settled we decided to visit a Aashram on the banks of Narmada River in Narmada district near Rajpipla. This is the place which we visit at least once in a year and I always wish that I get more chance to visit there and can spend a longer duration there. Well this time we were getting a night stay there and most importantly darshan of Swamiji.
Darshan of Swamiji is possible only few hours starting late night.

As my younger daughter stayed back to support her Didi at the hostel, me and my wife took up for the aashram.
Our travel has to be for at least 3 hours one side, so there was enough time for me to get on with my favorite songs too.
One of the albums that I carried with me was ‘Immortal melodies from Navketan Films: Vol.2-Philosophical’ (SA re ga ma – Bombay Talkies)
(Few years back I had got this one album from a famous online store)

As the playlist proceeds one by one this song appears!

‘Man ke mandir mein jalti rahe geet sangeet ki aarti,
Mujhko vardaan de, mujhko vardaan de Maata Saraswati …’

When the word by word fall on my ear I was relating it with our daily life, the daily activities that we perform and finally we search some time for leisure, some time to take us off from the hectic life, some to time to unwind ourselves…
But now it has become difficult, because, as far as I am concerned I get very less time to play my favorite CD/DVD’s, to listen all the cassettes that I have collected over these 29 years so far. Sometime I am angry with myself for the job I have taken and for the circumstances I have created myself which give very less time for me.

But none the less the songs are there playing all the time in my mind and what if I cannot hear the CDs or Cassettes, I can sing them I can keep humming different songs according to the changing situations whatever I faced and wherever I am. That way I remain connected to music every time all the time.

The song under discussion today says it all for me. All I can pray to God that ‘sukh dukh mein aap sadaa hamaare saath rehna, aur man ke mandir mein sangeet ki jyot jalaaye rakhna’ (I remember the very first time when I meet Swamiji he aksed me what I wish from the Gods as he has already given me a ‘happy life’, so he advised me that whenever I pray to God I should only asked him to ‘be with us in our ‘hard times’ as well ‘when we are sailing smooth’)

Haath bhi nahin jab hil sake
Saaz bhi jab nahin paas ho

Maut bhi ho saamne khadi
Mushkil aur har saans ho

Man ke mandir mein jalti rahe
Geet sangeet ki aarti
Mujhko vardaan de
Maata Saraswati

How true it is, because going through hard times also we were connected to the divine form of Music – listening, singing and praying Prarthanaa, Bhajans at the ‘Aashram’

‘Man ke mandir mein jalti rahe – Geet Sangeet ki Aarti’…

***

Cleanliness Pledge

स्वच्छता शपथ
( स्वच्छ भारत – एक कदम स्वच्छता की ओर )

महात्मा गांधी ने जिस भारत का सपना देखा था उसमे सिर्फ राजनैतिक आज़ादी ही नहीं थी, बल्कि एक स्वच्छ एवं विकसित देश कि कल्पना भी थी !

महात्मा गांधी ने गुलामी कि जंजीरों कों तोड़कर माँ भारती कों आज़ाद कराया !

अब हमारा कर्तव्य है कि गंदगी कों दूर करके भारत माता कि सेवा करें !

मैं शपथ लेता हूँ कि मैं स्वयं स्वच्छता के प्रति सजग रहूँगा और उसके लिए समय दूंगा !

हर वर्ष १०० घंटे यानी हर सप्ताह २ घंटे श्रमदान करके स्वच्छता के इस संकल्प कों चरितार्थ करूँगा !

मैं न गंदगी करूँगा न किसी और कों करने दूंगा !

सबसे पहले मैं स्वयं से, मेरे परिवार से , मेरे मुहल्ले से, मेरे गाँव से एवं मेरे कार्यस्थल से शुरुआत करूँगा !
मैं यह मानता हूँ कि दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखतें हैं उसका कारण यह है कि वहाँ के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं !

इस विचार के साथ मैं गाँव-गाँव और गली-गली स्वच्छ भारत मिशन का प्रचार करूँगा !

मैं आज जो शपथ ले रहा हूँ, वह अन्य १०० व्यक्तियों से भी करवाऊंगा !

वे भी मेरी तरह स्वच्छता के लिए १०० घंटे दें, इसके लिए प्रयास करूँगा !

मुझे मालूम हैं कि स्वच्छता कि तरफ बढ़ाया गया मेरा एक कदम पूरे भारत देश कों स्वच्छ बनाने में मदद करेगा !

Cleanliness Pledge

(re-blogged  from Local Circles)